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तेरे आँसू…

 तेरे आँसू, मेरा समंदर…

 -सुनराज़ 


तेरे आँसू में मेरा दिल बह जाता है,

तेरे ग़म से मेरा मन सहम जाता है ।


तेरे लिए ही तो ये साँसें बची हैं,

तेरे बिना तो मेरी राहें कटी हैं।


तेरे सपनों में मैं अपना जहाँ देखूँ,

तेरी हँसी में मैं सुबह-ओ-शाम देखूँ।


तू मेरी दुआओं का पहला असर है ,

तू मेरी मोहब्बत का अंतिम सफ़र है ।


मत रो मेरी गुड़िया, मैं यहीं खड़ी हूँ,

तेरे लिए मैं हर आँधी झेले पड़ी हूँ।


क्या हुआ जो पल भर दूर हो जाऊँ,

तेरे साए में मैं साँसें बसाऊँ।


तेरा हर दर्द मैं अपने दिल में रखूँ,

तेरे लिए अपना जहाँ भी बिछा दूँ।

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